केदारनाथ का नया मार्ग खतरनाक, यहां हैं सात एवलांच ज़ोन

केदारनाथ क्षेत्र को वर्ष 2013 में आई आपदा के बाद जो नया मार्ग बनाया गया है, उसकी सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। इसरो की नोडल एजेंसी उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यूसैक) ने इस मार्ग पर एवलांच (हिमस्खलन) का खतरा बताया है।
दैनिक जागरण के अनुसार यूसैक के निदेशक डॉ. एमपीएस बिष्ट ने भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. के. विजय राघवन के समक्ष सेटेलाइट चित्रों का प्रस्तुतीकरण देकर बताया कि केदारपुरी क्षेत्र में ही सात बड़े एवलांच जोन हैं। इसके अलावा गौरीकुंड तक कई छोटे एवलांच जोन भी हैं। निदेशक डॉ. बिष्ट ने बताया कि पूर्व में जो पारंपरिक मार्ग था, वह नदी के दायीं तरफ था। नया मार्ग भी इसी तरफ बनाया जाना चाहिए था। क्योंकि, इस क्षेत्र में सख्त चट्टानें हैं। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि दायीं तरफ रोपवे बनाया जा सकता है।
यूसैक निदेशक ने भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार को बताया कि आपदा के बाद तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने हड़बड़ी में मार्ग निर्माण का कार्य शुरू करा दिया। जिस जमीन पर मार्ग बना है, वह इसलिए कच्ची है कि उसका निर्माण एवलांच के साथ आए मलबे से हुआ है।

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