कोरोना से लड़ाई के लिए हिंदू मठों-मंदिरों ने करोड़ों का दान दिया

हिंदू धर्म सचमुच वो पद्धति है, जो जीना सिखाती है. यानी कि ये वो धर्म है कि जहां केवल परलोक की चिंता नहीं की जाती. यहाँ इहलोक की भी चिंता होती है. यही वजह है कि एक गैर हिंदू संगठन देश के लिए गुनाहगार बनकर उभरा है और उसकी वजह से कोरोना के मरीज़ बेतहाशा बढ़े. वहीं भारत के कई मंदिर और हिंदू संगठन कोरोना से लड़ाई लड़ने के लिए लाखों-करोड़ों रूपये दान कर रहे हैं.
आन्ध्र प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध ‘तिरुपति बालाजी मंदिर ट्रस्ट’ की ओर से राज्य सरकार को 200 करोड़ रूपये दान स्वरूप भेजे गए हैं . तिरूपति में प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में दर्शनार्थी आते हैं. कोरोना संक्रमण के चलते इन दिनों यहां दर्शन पर रोक है. वहीं महाराष्ट्र के भी विश्व प्रसिद्ध शिर्डी साईं ट्रस्ट की ओर से 51 करोड़, माता वैष्णो देवी मंदिर ट्रस्ट की ओर से 7 करोड़ रुपये प्रधानमंत्री विशेष सहायता कोष में जमा कराए गए. कांची मठ ने दस-दस लाख रूपये प्रधानमंत्री कोष और तमिलनाडु मुख्यमंत्री में भी जमा किये. बिहार की राजधानी पटना के महावीर मंदिर ट्रस्ट ने एक करोड़ रूपये की राशि मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए दिए.
वहीं गायत्री परिवार, शांतिकुंज हरिद्वार, वेदमाता गायत्री मंदिर ट्रस्ट की ओर से उत्तराखंड के मुख्यमंत्री कोष में 1 करोड़ रुपाए, आई अंबाबाई महालक्ष्मी देवस्थान, कोल्हापुर की ओर से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री राहत कोष में 2 करोड़, गुजरात स्थित सोमनाथ मंदिर ने 1 करोड़, अम्बाजी मंदिर 1 करोड़, साँवलिया मंदिर मण्डल 50 लाख, मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट (हरिद्वार) ने 16 लाख रूपये जनसेवा के कार्यों के लिए दान दिए. छत्तीसगढ़ के महामाया ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री राहत कोष ने पांच लाख ग्यारह हजार और रेड क्रॉस सोसाइटी को एक लाख ग्यारह हज़ार रुपये दान किये. गुजरात के सात स्वामीनारायण मंदिरों की ओर से कुल 1.88 करोड़ रूपये दान में दिए. इसके अलावा मंदिर की ओर से खाना भी वितरित किया जा रहा है. मंदिर ने अपने 500 कमरे आइसोलेशन के लिए भी दिए हैं. राजस्थान के झुंझनू के रानी सती मंदिर ने भी 200 कमरे आइसोलेशन के लिए उपलब्ध कराये.
इसके अलावा इस वैश्विक आपदा से देशवासियों को बचाने के लिए मध्य प्रदेश में स्थित उज्जैन महाकालेश्वर की ओर से 2.5 लाख रुपये मुख्यमंत्री सहायता कोष व 2.5 लाख रुपये प्रधानमंत्री राहत कोष में दान दी गई. इसके अलावा अन्न क्षेत्र के माध्यम से सभी जरूरतमंद लोगों को भोजन की व्यवस्था है. राजस्थान के सालसर बालाजी धाम की ओर से 22 लाख रुपए, सीकर स्थित जीणमाता मन्दिर ट्रस्ट की ओर से 5 लाख रु., खाटू श्याम जी मन्दिर ट्रस्ट ने 11 लाख रूपये राज्य के मुख्यमंत्री सहायता कोष में जमा की गई. अचलेश्वर मन्दिर ग्वालियर ने 1 लाख 11 हजार रुपये प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा किए. गुजरात में स्वामीनारायण मन्दिर संस्थान 11 लाख की सहायता दी. श्री ब्रह्माजी का मन्दिर एवं राजपुरोहित समाज विकास न्यास, श्री खेतेश्वर ब्रह्मधाम तीर्थ आसोतरा बाड़मेर राजस्थान की ओर से सन्त श्री तुलछाराम जी महाराज के सान्निध्य में कोरोना महामारी से निपटने में 11 लाख रुपये का सहयोग किया है. श्री सिद्ध शक्तिपीठ महामाया देवी, रतनपुर जिला बिलासपुर, छत्तीसगढ़ की ओर से मुख्यमंत्री राहत कोष में 5 लाख 11 हजार रुपये का दान किए गए. इसके अलावा कानपुर स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर ने उनके अस्पताल को क्वारेंटाइन में बदलने का प्रस्ताव दिया है. इसके अलावा हनुमान मंदिर और आनंदेश्वर धाम मंदिर कई जरूरत मंद लोगों के भोजन की व्यवस्था कर रहे हैं.
बाबा भोले की नगरी वाराणसी में विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट व अन्नपूर्णा मंदिर ट्रस्ट की ओर से रोजाना हजारों लोगों को भोजन कराया जा रहा है. श्रीराम की नगरी अयोध्या तथा श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा में विभिन्न अन्न क्षेत्रों के माध्यम से हजारो लोग भोजन ग्रहण कर रहे हैं. इसके अलावा जय अम्बे माता मंदिर, बजरंगगढ़, अजमेर ने 1 लाख 51 हजार, वीवीआईपी रोड स्थित श्रीराम मंदिर, रायपुर 2.51 लाख, जैतु साव मठ, रायपुर ने 1.5 लाख और मशीन, प्रिंस संस्थान 05 लाख, चण्डी माता मंदिर, छ्तीसगढ़ ने एक लाख, कटनी में हरे माधव परमार्थ सत्संग समिति ने 13 लाख रूपये व हरे माधव रूहानी बाल संस्कार समिति के बच्चों ने 21013 रुपये की राशि कटनी जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री सहायता कोष में दी है.